कालमेघ पौधे से हो सकता है कोविड-19 का इलाज

यह शोध गोरखपुर विश्वविद्यालय वनस्पति विज्ञान विभाग के शोध छात्र रजनीश राय एवं प्रोफेसर मालविका श्रीवास्तव के द्वारा किया गया है। नोबल कोरोना वायरस रोग जो कि कोविड-19 के नाम से प्रसिद्ध है, वह एक वायरस SARS-CoV-2 के द्वारा होता है। यह वायरस संक्रमण के बाद हमारे शरीर के प्राथमिक प्रतिरोधक प्रक्रिया के सक्रिय होने में 7 से 10 दिन लगते हैं इस दौरान वायरस तेजी से अपनी वृद्धि करता है और अलग-अलग तरह के रासायनिक पदार्थ निकालता है, जिससे हमारा इम्यून सिस्टम सक्रिय होता है और भिन्न तरह के रोग के लक्षण प्रदर्शित होने शुरू हो जाते हैं। अब इसमें हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता के ऊपर निर्भर करता है कि वह इन लक्षणों से अपने आप को कैसे बचा पाती है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना जरूरी है जो मजबूती से संक्रमण से तथा शरीर की कोशिकाओं और उसको के मरने से बचाएगा।
इस अध्ययन में शोधार्थियों ने कालमेघ पौधे का चुनाव किया, जिस का वैज्ञानिक नाम एंड्रोग्राफिस पैनीकुलेटा है जो एकेन्थेसी कुल का पौधा है। इस पौधे मैं विभिन्न प्रकार के औषधिय गुण पाए जाते हैं, ऐसा हमारे प्राचीन चिकित्सा पद्धति में जिक्र पाया जाता है। जिसमें बहुत सारी लाइलाज बीमारियों जैसे कैंसर, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, अल्सर, लेप्रोसी, इनफ्लुएंजा, डिसेंट्री इत्यादि के इलाज में इस पौधे का प्रयोग किया जाता रहा है।

इस पौधे में विभिन्न प्रकार के जैव रासायनिक पदार्थ होते है, जैसे एंड्रोग्राफ़ोलाइड, नियोएंड्रोग्राफ़ोलाइड, डीहाइड्रोएंड्रोग्राफ़ोलाइड महत्वपूर्ण होता है। इन जैव रसायनों के पास एंटी-इन्फ्लेमेटरी और इम्यूनिटी माड्युलेट्री गुण पाया जाता है। यह जैव रसायन न्यूमोनिया के लक्षणों को कम करने की योग्यता रखते हैं। उपर्युक्त जैव रसायनों में से एंड्रोग्राफ़ोलाइड के पास anti-inflammatory प्रभाव होता है। इस पौधे से एंड्रोग्राफ़ोलाइड को निकाल कर जब देखा गया तो यह कंपाउंड इम्यूनोमोड्यूलेटरी प्रभाव वाला पाया गया, जो हमारे इम्यून सिस्टम को और प्रभावी बनाता है इन सभी गुणों को देखते हुए यह निष्कर्ष निकलता है की कालमेघ एक चमत्कारिक पौधा है जो कोविड-19 वायरस के द्विगुणन को तथा इससे उत्पन्न होने वाले बीमारी के लक्षणों को ठीक कर सकता है। इस तरीके से देखा जाए तो कालमेघ पौधे को जब तक कोई ऑथेंटिक दवाई खोज नहीं ली जाती है तब तक हम एक हर्बल विकल्प और एक संपूरक दवा के रूप में प्रयोग कर सकते हैं।

              Prof Rajnish Rai
       Prof Malvika Srivastava